पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत सामने आई है। युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान ने भारत सहित कुछ “मित्र देशों” को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)) से गुजरने की अनुमति दे दी है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल और गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही थी। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, उसके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है और इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया भर में सप्लाई होती है।
भारत की बात करें तो देश की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती है।
- भारत का लगभग 60% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है
- करीब 90% आयातित गैस इसी रूट से गुजरती है
ऐसे में इस मार्ग में कोई भी रुकावट सीधे आम लोगों और इंडस्ट्री पर असर डाल सकती है।
किन देशों को मिली है अनुमति?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के अनुसार, “मित्र देशों” को इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी गई है। इनमें शामिल हैं:
- भारत
- चीन
- रूस
- इराक
- पाकिस्तान
हालांकि अमेरिका और इजराइल जैसे देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता सीमित या बंद बताया गया है।
भारत को क्या फायदा होगा?
इस फैसले का भारत पर सीधा और सकारात्मक असर पड़ने वाला है।
फिलहाल कई भारतीय जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनमें भारी मात्रा में ऊर्जा संसाधन लदा हुआ है। अब उनके सुरक्षित निकलने की उम्मीद बढ़ गई है।
- करीब 22 भारतीय जहाज प्रभावित बताए जा रहे हैं
- इनमें कच्चा तेल, LPG और LNG जैसी जरूरी सप्लाई शामिल है
इसके अलावा, इन जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता थी, जो अब काफी हद तक कम हो सकती है।
क्या पूरी तरह सामान्य हो गई है स्थिति?
हालांकि यह फैसला राहत देने वाला है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
जहाजों की आवाजाही पहले जैसी स्वतंत्र नहीं है और हर मूवमेंट को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि जोखिम अभी भी बना हुआ है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारत और ईरान के बीच संवाद
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की कूटनीतिक भूमिका भी अहम रही है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री S. Jaishankar के स्तर पर ईरान के साथ लगातार बातचीत जारी रही। इसी संवाद का असर है कि भारत को यह राहत मिल सकी।
निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति भारत के लिए फिलहाल एक बड़ी राहत जरूर है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता से गुजर रहा है।
हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं है, लेकिन इस फैसले से भारत की ऊर्जा सप्लाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर बड़ी चिंता कुछ हद तक कम जरूर हुई है।






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